यह आ́र्टिकल NDTV में प्रकाशित एक Opinion piece है जिसमें बताया गया है कि पाकिस्तान में “27th Constitutional Amendment Bill” के ज़रिए कैसे असिम मुनीर की शक्ति संवैधानिक रूप से बढ़ाई जा रही है। (www.ndtv.com)
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1. प्रस्तावित संशोधन क्या है? (“What’s the amendment?”)
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पाकिस्तान की फेडरल सरकार ने एक बिल पेश किया है — “27th Constitutional Amendment Bill” — जिसे 10 नवंबर को सेन ट (Senate) में पास कर दिया गया है। (www.ndtv.com)
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यह सिर्फ एक मामूली बदलाव नहीं है, बल्कि संवैधानिक (constitutional) ढांचे में एक गंभीर परिवर्तन है: यानी सरकार और सेना के बीच शक्ति-संतुलन बदलने वाला है। (www.ndtv.com)
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मुख्य तौर पर, इस बिल के द्वारा संविधान के अनुच्छेद (Article) 243 में बदलाव प्रस्तावित हैं। (www.ndtv.com)

2. अनुच्छेद 243 में क्या-क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?
यह भाग बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इन बदलावों से देश की सिविल (civil) और मिलिटरी (military) व्यवस्था में अंतराल (shift) आ सकता है। इनमें मुख्य बातें हैं:
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पुराने पद “Chairman Joint Chiefs of Staff Committee (CJCSC)” को समाप्त (abolish) किया जाना है। (www.ndtv.com)
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नया पद “Chief of Defence Forces (CDF)” बनाया जाना है, और यह पद उसी समय के Army Chief द्वारा संभाला जायेगा। (www.ndtv.com)
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साथ ही, “Commander of National Strategic Command” नाम से एक पद होगा, जिसे प्रधान मंत्री (Prime Minister) की सिफ़ारिश पर CDF द्वारा नियुक्त किया जाएगा। (www.ndtv.com)
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यह बिल “life-long constitutional protection” देता है 5-star rank officers को (उदाहरण के लिए Field Marshal) – उन्हें विशेष संवैधानिक सुरक्षा मिलेगी, जैसे कि अनुच्छेद 248 एवं अनुच्छेद 47 के तहत। (www.ndtv.com)
3. असिम मुनीर के लिए क्या मायने रखता है?
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वर्तमान Army Chief असिम मुनीर इस बदलाव के तहत स्वतः नए पद CDF में आ सकते हैं। इसके साथ उनका नियंत्रण तथा संवैधानिक शक्ति काफी बढ़ जाएगी। (www.ndtv.com)
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यह बिल उनकी हालिया प्रमोशन (promotion) को संवैधानिक वैधता (constitutional legitimacy) देता है – यानि सिर्फ सेना के अंदर नहीं, बल्कि संविधान में भी। (www.ndtv.com)
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उन्हें “lifetime immunity” जैसे संरक्षण मिल सकते हैं — यानी उनकी जवाबदेही (accountability) कम हो सकती है। (www.ndtv.com)
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4. क्या ये बदलाव लोकतंत्र (Democracy) या तानाशाही (Dictatorship) के नज़दीक ले जाते हैं?
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लेख में बताया गया है कि पाकिस्तान में पहले से ही सेना का प्रभाव बहुत रहा है। अब यह बदलाव उस प्रभाव को संवैधानिक रूप दे रहा है। (www.ndtv.com)
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ये बदलाव उन पूर्व सैनिक व शासकों (military rulers) की राह पर संकेत करते हैं — जैसे Ayub Khan, Zia‑ul‑Haq और Pervez Musharraf ने किया था। (www.ndtv.com)
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उदाहरण के लिए, आयुब ख़ान ने 1962 में संविधान में बदलाव कर अपने-आप को शक्तिशाली बनाया था। (www.ndtv.com)
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इस तरह, यह बदलाव “सैन्य तानाशाही की झलक” देते हैं—जहाँ एक व्यक्ति या सेना का नेतृत्व संविधान के अंदर प्रमुख शक्ति बन जाता है।
5. देश-अंतरराष्ट्रीय प्रभाव क्या हो सकते हैं?
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इस बिल से पाकिस्तान में नागरिक सरकार (civil government) की भूमिका कम हो सकती है, जबकि सेना की संवैधानिक (constitutional) शक्ति बढ़ सकती है। (www.ndtv.com)
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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, विशेष रूप से पश्चिमी देशों में ज्यादा चिंता नहीं देखी गई है — ऐसा इसलिए क्योंकि वे पहले से ही पाकिस्तान में सेना को “असल शक्ति केंद्र” के रूप में देखते आये हैं। (www.ndtv.com)
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भारत के लिए इसका मतलब यह हो सकता है कि उसकी पाकिस्तान नीति में ज्यादा बदलाव नहीं होगा — क्योंकि वह पहले से ही पाकिस्तान को “सिक्योरिटी-फोकस्ड” (security-focused) रूप में देखता है। (www.ndtv.com)
6. निष्कर्ष: यह क्यों महत्वपूर्ण है?
संक्षिप्त में — यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पाकिस्तान में सेना द्वारा संवैधानिक रूप से शक्ति पर कब्जा करने का एक कदम हो सकता है।
यदि यह संशोधन असिम मुनीर को प्रस्तावित पदों के माध्यम से नियमित (permanent) शक्ति दे देता है, तो इसका मतलब होगा कि पाकिस्तान में लोकतांत्रिक नियंत्रण कमजोर हो सकता है और सेना-प्रधान शासन की दिशा में और कदम बढ़ सकते हैं।